दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ किया कि शिक्षा विभाग के पास गैर-सहायता प्राप्त (प्राइवेट) स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस को रेगुलेट करने का अधिकार है। हालांकि, ऐसी पावर या अधिकार व्यवसायीकरण, मुनाफाखोरी और कैपिटेशन फीस वसूलने में शामिल होने से रोकने के उपायों से आगे नहीं बढ़ सकते।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच के फैसले के मुताबिक, ऐसा नहीं है कि स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस को सरकार रेगुलेट नहीं कर सकती।
कैपिटेशन फीस वसूलने में लिप्त न हों
रेगुलेट करने की इजाजत केवल यह सुनिश्चित करने के लिए है कि ऐसे स्कूल मुनाफाखोरी या शिक्षा के व्यवसायीकरण या कैपिटेशन फीस वसूलने में लिप्त न हों। कोर्ट ने कहा कि इसे रेगुलेट करने के लिए सरकार जो भी तरीके अपनाए, उसके जरिए यह तय करना होगा कि प्राइवेट स्कूल अपने लाभ सरप्लस का इस्तेमाल शैक्षणिक संस्थान के फायदे के अलावा किसी अन्य काम के लिए न करें। फीस स्ट्रक्चर वहां मौजूद बुनियादी ढांचे और अन्य सुविधाओं, टीचरों और कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन और संस्थान के विस्तार या बेहतरी से जुड़ी भावी योजनाओं को ध्यान में रखते हुए तय किया जाना चाहिए।
स्कूल के खिलाफ की जा सकती है कार्रवाई
डिविजन बेंच ने संबंधित मुद्दे पर अपनी सिंगल बेंच के 7 फरवरी 2024 को सुनाए गए फैसले से पूरी सहमति जताई। उसे चुनौती देने वाली अपीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, हम सिंगल बेंच के फैसले से पूरी तरह सहमत है कि किसी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूल द्वारा ली जाने वाली फीस को तय करने में शिक्षा विभाग के दखल का दायरा उस मामले तक सीमित है, जिसमें स्कूल कैपिटेशन फीस वसूलने में या मुनाफाखोरी में शामिल है। ऐसे में, स्कूलों द्वारा दाखिल की जाने वाली फीस डिटेल की जांच करने पर शिक्षा विभाग को यह पाता चलता है कि स्कूलों द्वारा जमा राशि का खर्च डीएसईए, 1973 या उसके अंतर्गत बनाए गए प्रावधानों के अनुसार नहीं है, तो स्कूल के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सकती है।
फीस वापस करने का निर्देश देने का है अधिकार
मौजूदा मामले में ब्लूबेल्स स्कूल इंटरनेशनल के कुछ बच्चों के पैरंट्स और शिक्षा निदेशालय ने सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थीं। शिक्षा निदेशालय की एक अपील लीलावती मंदिर सीनियर सेकंडरी स्कूल से जुड़ी थी। डिविजन बेंच को यह तय करना था कि क्या शिक्षा विभाग के पास जरूरी अधिकार या पावर है कि वह निजी तौर पर संचालित और गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को डीएसईए, 1973 की धारा 17(3) और 18(4) में निहित प्रावधानों के अनुसार अपनी फीस बढ़ाने से रोक सके। अगर ऐसे किसी स्कूल ने पहले ही फीस बढ़ा दी हो, तो क्या शिक्षा विभाग को स्कूल को स्टूडेंट्स से ली जाने वाली अधिकतम फीस से ज्यादा ली गई फीस वापस करने का निर्देश देने का अधिकार है।
No comments:
Post a Comment