Latest News सीएम श्री स्कूल प्रवेश 2026:आवेदन की अंतिम तिथि 25 मार्च तक बढ़ा दी गई है....., गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली (GGSIPU) में प्रवेश के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 31 मार्च है..,

Saturday, March 14, 2026

CM SHRI Schools Admission 2026: आवेदन की अंतिम तिथि 25 मार्च तक बढ़ी

नई दिल्ली। शिक्षा विभाग ने CM SHRI Schools Admission 2026 के तहत कक्षाओं VI, IX और XI में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब छात्र-छात्राएं 🟥 25 मार्च 2026 (शाम 5:00 बजे तक) आवेदन कर सकते हैं। पहले आवेदन की अंतिम तिथि इससे पहले निर्धारित की गई थी, लेकिन विद्यार्थियों और अभिभावकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसे आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूचना के अनुसार, यह प्रवेश प्रक्रिया शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए आयोजित की जा रही है। इच्छुक छात्र-छात्राओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम तिथि के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रवेश प्रक्रिया के तहत चयन के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसके लिए विस्तृत सर्कुलर और पाठ्यक्रम भी जारी कर दिया गया है, ताकि विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी कर सकें। विभाग की ओर से परीक्षा से संबंधित दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं, जिनमें आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और परीक्षा के नियमों की जानकारी दी गई है।
अधिकारियों के अनुसार, इन स्कूलों में विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा, बेहतर सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण उपलब्ध कराया जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र इन स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन करते हैं।
शिक्षा विभाग ने अभिभावकों और छात्रों से अपील की है कि वे आवेदन की अंतिम तिथि का विशेष ध्यान रखें और समय रहते ऑनलाइन फॉर्म भर दें, ताकि किसी प्रकार की परेशानी से बचा जा सके।
महत्वपूर्ण जानकारी
प्रवेश कक्षाएं: VI, IX और XI
सत्र: 2026–27
आवेदन प्रक्रिया: ऑनलाइन
🟥 अंतिम तिथि: 25 मार्च 2026, शाम 5:00 बजे तक

Friday, March 13, 2026

इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वुमन के दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में 1181 छात्राओं को विभिन्न पाठ्यक्रमों की डिग्री देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई

नई दिल्ली, दिनांक 12 मार्च, इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वुमन (Indira Gandhi Delhi Technical University for Women) के दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में 1181 छात्राओं को विभिन्न पाठ्यक्रमों की डिग्री देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की महिलाएं केवल विकास की सहभागी नहीं हैं, बल्कि देश के नेतृत्व की भूमिका भी निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि साहस और मेहनत का कोई जेंडर नहीं होता। इतिहास गवाह है कि महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का परिचय दिया है। तकनीकी शिक्षा के माध्यम से महिलाएं और अधिक सशक्त हो रही हैं और भविष्य में देश के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार शिक्षा, कौशल विकास, तकनीक और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। जब महिलाएं शिक्षा और कौशल से मजबूत बनती हैं तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम होती हैं। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाली छात्राओं से अपील की कि वे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज और देश के विकास में करें।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह उस मेहनत और समर्पण का सम्मान है जो छात्राओं ने अपने अध्ययन के दौरान किया है। उन्होंने कहा कि आज भारत में तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और युवा महिलाएं इस बदलाव की अग्रणी शक्ति बन रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की, जिसमें बताया गया कि इस वर्ष विश्वविद्यालय की छात्राओं ने शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। कई छात्राओं को देश और विदेश की प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।
दीक्षांत समारोह में कुल 1181 छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 938 अंडरग्रेजुएट, 212 पोस्टग्रेजुएट और 31 पीएचडी डिग्रियां शामिल थीं। इसके अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को चांसलर मेडल, वाइस चांसलर मेडल और एक्सीलेंस अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया।

समारोह के अंत में विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी छात्राओं को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और विश्वास व्यक्त किया कि ये युवा महिलाएं अपने ज्ञान, कौशल और नेतृत्व क्षमता से देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। 🎓✨

Wednesday, March 11, 2026

दिल्ली पुस्तकालय संघ का 88 वां स्थापना दिवस एवं वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह सम्पन्न

दिल्ली विश्वविद्यालय गांधी भवन में दिल्ली पुस्तकालय संघ का 88 वां स्थापना दिवस एवं वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुआ। डीएलए के अध्यक्ष, गांधी भवन के निदेशक एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. के. पी. सिंह ने सभी आगंतुक अतिथियों का परिचय कराया। अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह से स्वागत एवं अभिनंदन किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के पूर्व पुस्तकालय अध्यक्ष प्रो. प्रेम सिंह जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रो. एस. आर. रंगनाथन जैसे व्यक्तित्वों की कर्मठता के कारण आज हम पुस्तकालय विज्ञान विभाग को जान पाए हैं। गणित के प्रोफेसर होने के बाद भी प्रो. रंगनाथन जी की पुस्तकालय विज्ञान विषय को लेकर जो निष्ठा थी, उसको शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। विश्वविद्यालय पुस्तकालयों के बिना अधूरे हैं। विश्वविद्यालय पुस्तकालयों से ही आगे बढ़ सकते हैं।
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के आरंभ के समय से 1960 के दशक तक की पुस्तकालय विज्ञान विभाग एवं पुस्तकालय की यात्रा का संस्मरण याद करते हुए उनके जीवन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किस तरह से 1957 में दिल्ली विश्वविद्यालय में केंद्रीय पुस्तकालय का निर्माण संभव हुआ। 1605 पुस्तकों से 3 लाख पुस्तकों के संकलन तक की प्रगति का उल्लेख किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुस्तकालय विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आर. के. भट्ट ने सभी का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि प्रो. के. पी. सिंह जैसे कर्मयोगी जीवन में बहुत कम मिलते हैं। स्व प्रेरणा से आगे बढ़ने की जिजीविषा, कर्मठता इनके व्यक्तित्व को अत्यंत विशेष बनाती है। प्रो. के. पी. सिंह दिल्ली पुस्तकालय संघ को आज की प्रगति में भी मार्गदर्शक हैं।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय की डीन (अकादमिक गतिविधि) प्रो. के. ललवानी ने अपने संबोधन में सबसे पहले डीएलए का आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रो. के. पी. सिंह की कर्मठता की प्रशंसा की। पुस्तकालय एक संस्थान के रूप में विकसित हो रही कामना है। उन्होंने दिल्ली पुस्तकालय संघ के स्थापना दिवस की शुभकामनाएं भी प्रेषित की। तत्पश्चात दिल्ली पुस्तकालय संघ का वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह सम्पन्न हुआ।

Tuesday, March 10, 2026

छात्रों के लिए उपयोगी वेबसाइट: Bharat Admission Portal

आज के डिजिटल दौर में पढ़ाई और करियर से जुड़ी जानकारी इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध है, लेकिन सही और विश्वसनीय जानकारी ढूंढना अक्सर कठिन हो जाता है। ऐसे में Bharat Admission Portal छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है।

यह ब्लॉग मुख्य रूप से छात्रों को कॉलेज एडमिशन, करियर विकल्प, विभिन्न कोर्स और शिक्षा से जुड़े अपडेट प्रदान करता है। यहां पर छात्रों को 10वीं और 12वीं के बाद क्या करें, कौन सा कोर्स चुनें और आगे किस क्षेत्र में करियर बनाया जा सकता है, जैसी महत्वपूर्ण जानकारी सरल भाषा में मिलती है।

इस ब्लॉग की खास बात यह है कि यहां दी गई जानकारी छात्रों के लिए उपयोगी और मार्गदर्शक होती है। शिक्षा से जुड़े नए अपडेट, प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी और करियर से संबंधित लेख भी नियमित रूप से प्रकाशित किए जाते हैं।

छात्र और अभिभावक इस ब्लॉग को नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से आसानी से देख सकते हैं:

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यदि कोई छात्र अपने करियर को लेकर उलझन में है या एडमिशन से जुड़ी जानकारी ढूंढ रहा है, तो यह ब्लॉग उसके लिए एक उपयोगी मंच साबित हो सकता है।



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Monday, March 9, 2026

DU में 102 वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया, जिसमें एक लाख से अधिक छात्रों को उपराष्ट्रपति ने डिग्रियां प्रदान की

दिल्ली विश्वविद्यालय ने हाल ही दिनांक 28 फरवरी 2026 शनिवार को अपना 102वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया, जहां भारत के उपराष्ट्रपति और विश्वविद्यालय के कुलपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 1,20,408 छात्रों को डिजिटल डिग्री प्रदान की और व्यक्तिगत रूप से 10 मेधावी स्नातकों को पदक प्रदान किए।

इस समारोह में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को दर्ज करने वाली "बुक ऑफ हाइलाइट्स" का विमोचन भी किया गया।

स्नातकों को दीक्षांत करते हुए उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा, “दीक्षांत समारोह अंत नहीं बल्कि एक नई शुरुआत है। डिग्रियां मात्र प्रमाण पत्र हैं; सच्ची शिक्षा मानवता, चरित्र और जिम्मेदारी में झलकती है। शिक्षा जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं बल्कि एक सतत प्रक्रिया है।” उन्होंने छात्रों से ज्ञान, संवेदनशीलता और सेवा भाव के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया और इस बात पर जोर दिया कि आज के युवा 2047 के विकसित भारत को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
1922 में महज़ तीन हज़ार विद्यार्थियों के साथ स्थापित होने के बाद से विश्वविद्यालय के विकास पर प्रकाश डालते हुए, राधाकृष्णन ने कहा, “दिल्ली विश्वविद्यालय ने आज 90 से ज़्यादा विद्यार्थियों, असंख्य संकायों और हज़ारों शिक्षकों और स्वयंसेवकों के साथ एक मजबूत वैश्विक उपस्थिति स्थापित कर ली है। इसकी लगातार बेहतर होती रैंकिंग अकादमिक प्रकाशक को संबोधित है।”
दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह, जिन्होंने समारोह की अध्यक्षता की, ने छात्रों से विश्वविद्यालय के आदर्श वाक्य "निष्ठा धृति सत्यम" और "राष्ट्र सर्वोपरि" के सिद्धांत को प्रोत्साहन का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "यह देश हमारा है और हमें इसकी देखभाल करनी चाहिए। हमें ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए जिससे समाज के भाईचारे, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को ठेस पहुँचे।"
प्रोफेसर सिंह ने महिला छात्रों के योगदान की भी सराहना करते हुए कहा, "हमारी बेटियां राष्ट्र की शक्ति और गौरव हैं," और सभी स्नातकों से सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देते हुए राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाने का आग्रह किया।
समारोह के दौरान कुल 132 स्वर्ण और रजत पदक एवं पुरस्कार प्रदान किए गए, जिनमें स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को 112 स्वर्ण पदक और एक रजत पदक शामिल थे। दीक्षांत समारोह में 734 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि भी प्रदान की गई।
स्नातक स्तर के 1,09,003 छात्र, स्नातकोत्तर स्तर के 11,362 छात्र और FYUP कार्यक्रम के 43 छात्रों को डिग्री वितरित की गई, जिनमें नियमित DU छात्र, NCWEB और SOL छात्र शामिल हैं। शताब्दी अवसर योजना के तहत डिग्री पूरी करने वाले बीस छात्रों को भी सम्मानित किया गया।

भारत एडमिशन पोर्टल ब्लॉग: छात्रों के लिए उपयोगी जानकारी का भरोसेमंद मंच

आज के समय में छात्र-छात्राओं को कॉलेज एडमिशन, कोर्स, करियर विकल्प और सरकारी योजनाओं की सही जानकारी एक ही जगह मिलना आसान नहीं होता। ऐसे में Bharat Admission Portal छात्रों के लिए एक उपयोगी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनकर सामने आया है।
यह ब्लॉग मुख्य रूप से एडमिशन, करियर गाइडेंस, कोर्स जानकारी, कॉलेज अपडेट और शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सरल भाषा में उपलब्ध कराता है, जिससे छात्र सही निर्णय ले सकें।

🌐 वेबसाइट लिंक
छात्र इस ब्लॉग को नीचे दिए गए लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
इस वेबसाइट पर नियमित रूप से नई जानकारी अपडेट की जाती है, जिससे छात्र और अभिभावक शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण अपडेट आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

📚 ब्लॉग पर क्या-क्या जानकारी मिलती है
इस ब्लॉग पर कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख प्रकाशित किए जाते हैं, जैसे—
कॉलेज और यूनिवर्सिटी एडमिशन की जानकारी
10वीं और 12वीं के बाद कौन सा कोर्स करें
करियर गाइडेंस और नौकरी से जुड़े विकल्प
स्कॉलरशिप और सरकारी योजनाएं
प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी
विभिन्न प्रोफेशनल कोर्स की पूरी डिटेल
इस तरह यह ब्लॉग छात्रों को करियर प्लानिंग में मदद करने वाला एक मार्गदर्शक प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है।

👨‍💻 यूजर वेबसाइट को कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं
1️⃣ वेबसाइट ओपन करें
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ब्लॉग पर उपलब्ध आर्टिकल पढ़कर एडमिशन, कोर्स या करियर से जुड़ी जानकारी प्राप्त करें।
3️⃣ नए अपडेट पढ़ें
वेबसाइट पर समय-समय पर नए पोस्ट अपडेट किए जाते हैं, जिससे छात्रों को लेटेस्ट जानकारी मिलती रहती है।
4️⃣ जानकारी शेयर करें
छात्र इस ब्लॉग की जानकारी अपने दोस्तों और सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते हैं, ताकि अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।

🎯 छात्रों के लिए क्यों उपयोगी है यह ब्लॉग
सरल और समझने वाली भाषा
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एडमिशन से जुड़े अपडेट
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Saturday, March 7, 2026

10वीं के बाद कौन-सी स्ट्रीम चुनें? जानिए Science, Commerce और Arts में करियर के विकल्प

10वीं की बोर्ड परीक्षाएं समाप्त होने के बाद अधिकतर छात्र-छात्राएं अब इस सोच में हैं कि 11वीं में कौन-सी स्ट्रीम चुनी जाए। आमतौर पर स्कूलों में तीन प्रमुख स्ट्रीम होती हैं—साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स (ह्यूमैनिटीज)। सही स्ट्रीम का चयन छात्रों की रुचि, क्षमता और भविष्य के करियर लक्ष्यों को ध्यान में रखकर करना चाहिए। आइए जानते हैं कि इन तीनों स्ट्रीम के बाद कौन-कौन से कोर्स और नौकरी के अवसर उपलब्ध होते हैं।

1. Science Stream (साइंस)
साइंस स्ट्रीम को आमतौर पर सबसे अधिक विकल्प देने वाली स्ट्रीम माना जाता है। इसमें मुख्य रूप से Physics, Chemistry, Mathematics (PCM) या Physics, Chemistry, Biology (PCB) विषय होते हैं।

साइंस के बाद प्रमुख कोर्स
PCM (मैथ्स) के साथ
इंजीनियरिंग (B.Tech / BE)
आर्किटेक्चर (B.Arch)
बीएससी (Maths, Physics, Chemistry, Data Science)
कंप्यूटर साइंस / आईटी
पायलट ट्रेनिंग
डिफेंस सर्विसेज
PCB (बायोलॉजी) के साथ
MBBS (डॉक्टर)
BDS (डेंटिस्ट)
BAMS, BHMS
B.Pharm (फार्मेसी)
B.Sc. Nursing
Biotechnology / Microbiology
नौकरी की संभावनाएं
डॉक्टर, इंजीनियर
वैज्ञानिक
फार्मासिस्ट
लैब टेक्नीशियन
डेटा साइंटिस्ट
रक्षा सेवाएं

फायदा: साइंस लेने के बाद छात्र आगे चलकर कॉमर्स या आर्ट्स से जुड़े कई कोर्स भी चुन सकते हैं।

2. Commerce Stream (कॉमर्स)
कॉमर्स उन छात्रों के लिए बेहतर विकल्प है जिन्हें अकाउंट्स, बिजनेस और फाइनेंस में रुचि होती है। इसमें मुख्य विषय Accountancy, Business Studies, Economics और Maths होते हैं।
कॉमर्स के बाद प्रमुख कोर्स
B.Com (बैचलर ऑफ कॉमर्स)
BBA (बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन)
Chartered Accountant (CA)
Company Secretary (CS)
Cost and Management Accountant (CMA)
Bachelor in Economics
Banking और Finance कोर्स
नौकरी की संभावनाएं
चार्टर्ड अकाउंटेंट
बैंक अधिकारी
बिजनेस मैनेजर
टैक्स कंसल्टेंट
फाइनेंशियल एडवाइजर
कंपनी सेक्रेटरी

आज के समय में कॉमर्स के छात्रों के लिए बैंकिंग, फाइनेंस और कॉर्पोरेट सेक्टर में काफी अच्छे अवसर उपलब्ध हैं।

3. Arts / Humanities (आर्ट्स)
पहले आर्ट्स को कम महत्व दिया जाता था, लेकिन आज यह स्ट्रीम भी करियर के कई बेहतरीन विकल्प देती है। इसमें History, Political Science, Geography, Sociology, Psychology, Hindi/English जैसे विषय होते हैं।
आर्ट्स के बाद प्रमुख कोर्स
BA (History, Political Science, Sociology आदि)
BA Journalism and Mass Communication
Law (LLB)
Bachelor of Social Work
Fashion Designing
Hotel Management
Psychology
Civil Services की तैयारी
नौकरी की संभावनाएं
पत्रकार
वकील
सिविल सर्विसेज (IAS, IPS)
शिक्षक / प्रोफेसर
सामाजिक कार्यकर्ता
कंटेंट राइटर / मीडिया प्रोफेशनल
आज मीडिया, डिजाइन, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और सोशल सेक्टर में आर्ट्स छात्रों के लिए काफी अवसर बढ़े हैं।
स्ट्रीम चुनते समय ध्यान रखने वाली बातें
रुचि और क्षमता को प्राथमिकता दें।
सिर्फ दोस्तों या समाज के दबाव में स्ट्रीम न चुनें।

जिस विषय को पढ़ने में आनंद आए, उसी क्षेत्र में आगे बढ़ना बेहतर होता है।
भविष्य के करियर विकल्पों के बारे में पहले जानकारी जरूर लें।

✅ निष्कर्ष:
10वीं के बाद स्ट्रीम चुनना जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय होता है। साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स तीनों ही स्ट्रीम में अच्छे करियर विकल्प मौजूद हैं। जरूरी यह है कि छात्र अपनी रुचि और लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सही दिशा का चयन करें। सही मार्गदर्शन और मेहनत से किसी भी स्ट्रीम में उज्ज्वल भविष्य बनाया जा सकता है।

दिल्ली के नरेला में स्थित सीपीजे कॉलेज में 13 मार्च को ‘मेगा जॉब फेयर-2026 आयोजित होगा, 50 से अधिक कंपनियां लेंगी भाग

राजधानी दिल्ली के नरेला स्थित सीपीजे ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन द्वारा 13 मार्च 2026 को एक बड़े रोजगार मेले “मेगा जॉब फेयर-2026” का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम चन्द्रप्रभु जैन कॉलेज ऑफ हाइयर स्टडीज एंड स्कूल ऑफ लॉ के परिसर में आयोजित होगा, जहां विभिन्न क्षेत्रों की 50 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियां भाग लेकर युवाओं को रोजगार और इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करेंगी।
संस्थान की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यह जॉब फेयर शुक्रवार 13 मार्च को सुबह 9 बजे से शुरू होगा। इसमें दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा के विभिन्न कॉलेजों के छात्र भी भाग ले सकेंगे। आयोजकों का कहना है कि इस रोजगार मेले का उद्देश्य युवाओं को उद्योग जगत से जोड़ना और उन्हें सीधे कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलने का अवसर देना है।

एक ही मंच पर रोजगार के अवसर
मेगा जॉब फेयर में 50 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियां भाग लेंगी, जो विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी और इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करेंगी। कार्यक्रम के दौरान उम्मीदवारों के ऑन-द-स्पॉट इंटरव्यू और चयन की प्रक्रिया भी होगी, जिससे योग्य छात्रों को तुरंत रोजगार का अवसर मिल सकेगा।
आयोजकों के अनुसार यह कार्यक्रम छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा, जहां वे सीधे मानव संसाधन विशेषज्ञों (एचआर) से बातचीत कर अपने करियर के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्र ले सकेंगे भाग
इस जॉब फेयर में कई शैक्षणिक क्षेत्रों के छात्र भाग ले सकते हैं। इसमें इंजीनियरिंग, प्रबंधन, कंप्यूटर एप्लीकेशन, विधि, होटल मैनेजमेंट और मीडिया से जुड़े पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी शामिल हैं।
इसके अलावा बी.ए., एम.ए., बी.एससी., एम.एससी. जैसे स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों के छात्र भी इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं।
पॉलिटेक्निक, आईटीआई के विद्यार्थी तथा 12वीं उत्तीर्ण युवा भी इस रोजगार मेले में शामिल होकर अपने लिए रोजगार के अवसर तलाश सकते हैं।

छात्रों को दी गई महत्वपूर्ण सलाह
संस्थान की ओर से छात्रों को कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कुछ आवश्यक निर्देश भी जारी किए गए हैं। उम्मीदवारों को 9 मार्च 2026 से पहले अपना ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
इसके साथ ही छात्रों को सलाह दी गई है कि वे कार्यक्रम में भाग लेते समय अपने रिज्यूमे की कई प्रतियां, शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट आकार के फोटो तथा पहचान पत्र साथ लेकर आएं।
सभी प्रतिभागियों को औपचारिक परिधान में आने और कार्यक्रम के दौरान अनुशासन तथा पेशेवर व्यवहार बनाए रखने के लिए भी कहा गया है।

पंजीकरण प्रक्रिया
मेगा जॉब फेयर में भाग लेने के इच्छुक उम्मीदवारों को ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा। इसके लिए अंतिम तिथि 9 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। पंजीकरण के बाद चयन प्रक्रिया के लिए उम्मीदवारों को कार्यक्रम स्थल पर निर्धारित समय पर उपस्थित होना होगा।

आयोजकों की अपील
कार्यक्रम के आयोजकों ने छात्रों से इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि ऐसे रोजगार मेले छात्रों को उद्योग जगत के करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संस्थान के प्रतिनिधियों के अनुसार यह आयोजन न केवल छात्रों के लिए रोजगार का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि उन्हें अपने कौशल और आत्मविश्वास को प्रदर्शित करने का भी मंच देगा।

संपर्क जानकारी
कार्यक्रम से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए इच्छुक छात्र संस्थान के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए प्रो. अमित भारद्वाज (डायरेक्टर, आईआईसी), पंकज शर्मा (मैनेजर, कोलैबोरेशन), आकाश जैन (टीपीओ) और सौरभ सिंगला से संपर्क करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

युवाओं के लिए सुनहरा अवसर
आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में रोजगार के अवसर प्राप्त करना युवाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में इस तरह के जॉब फेयर छात्रों को सीधे कंपनियों से जुड़ने और अपने करियर की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।
मेगा जॉब फेयर-2026 को लेकर छात्रों में भी काफी उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में युवा इसमें भाग लेने के लिए पंजीकरण करा रहे हैं।
संस्थान की ओर से उम्मीद जताई गई है कि यह रोजगार मेला युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा और कई छात्रों को अपने सपनों की नौकरी पाने का अवसर मिलेगा।

रजिस्ट्रेशन लिंक 🔗:



Friday, March 6, 2026

राजधानी दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों के पिछले 3 साल के बैंक खातों का होगा ऑडिट

राजधानी दिल्ली के 1794 गैर-सहायता प्राप्त (प्राइवेट) स्कूलों के वित्तीय खातों और उनके लेनदेन की व्यापक जांच कराने का फैसला दिल्ली सरकार ने किया है। सरकार ने यह कदम स्कूलों के अधिक फीस वसूली और वित्तीय अनियमितताओं की मिल रही शिकायतों के चलते उठाया है। अधिकारियों के मुताबिक, स्कूलों के पिछले तीन साल के खातों की जांच की जाएगी।
यह जांच दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम एवं नियम, 1973 (DSEAR, 1973) के प्रावधानों के तहत की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार शिक्षा विभाग को पिछले कुछ समय से प्राइवेट स्कूलों में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कई शिकायतें मिल रही थीं। जांच रिपोर्ट में पर्याप्त तथ्य मिलने के बाद सरकार ने आगे कार्रवाई का निर्णय लिया है।
सरकार ने सभी प्राइवेट स्कूलों के खातों का ऑडिट कराने के लिए तीन प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) बनाने का फैसला किया है। हर यूनिट में 10-10 चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) होंगे। ये टीमें स्कूलों के पिछले तीन वर्षों के वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण करेंगी।
दिल्ली शिक्षा निदेशालय द्वारा तैयार स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के आधार पर जांच की जाएगी। इसमें स्कूलों के खातों से संबंधित अनियमितताओं, धन के दुरुपयोग या संदिग्ध लेन-देन की पहचान की जाएगी। इस प्रक्रिया में बैलेंस शीट, आय-व्यय विवरण, बैंक खाते, रजिस्ट्रेशन दस्तावेज, फीस वसूली के रिकॉर्ड और बिल-वाउचर सहित अन्य दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर बैंकों से भी जानकारी ली जाएगी।
इस पूरे काम में लगभग 6.3 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। शिक्षा विभाग तीनों पीएमयू को बराबर-बराबर स्कूल आवंटित करेगा। ऑडिट पूरा होने के बाद रिपोर्ट तैयार कर शिक्षा निदेशालय को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी स्कूल में वित्तीय अनियमितता पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
1794 प्राइवेट स्कूलों का किया जाएगा ऑडिट
3 प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट करेंगी जांच
30 चार्टर्ड अकाउंटेंट होंगे तीनों PMU में
इस कार्य पर लगभग 6.3 करोड़ रुपये खर्च होंगे
इसलिए पड़ी ऑडिट की जरूरत
स्कूलों में फीस बढ़ोतरी को लेकर सरकार और अभिभावकों के बीच लंबे समय से विवाद रहा है। कई स्कूलों पर फीस बढ़ाने और वित्तीय पारदर्शिता न रखने के आरोप लगे हैं। सरकार को इन मामलों में लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी के मद्देनज़र सरकार ने स्कूलों के खातों का स्पेशल ऑडिट कराने का फैसला किया है।
इस ऑडिट से यह पता लगाया जाएगा कि फीस बढ़ोतरी जायज थी या नहीं और क्या स्कूलों ने वित्तीय नियमों का पालन किया है। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे आवश्यक कार्रवाई करेगी।

Wednesday, March 4, 2026

होली – रंगों और उल्लास का पर्व

भारत का एक प्रमुख और प्राचीन त्योहार है, जिसे रंगों का त्योहार भी कहा जाता है। यह पर्व हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। होली केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह प्रेम, भाईचारे और आपसी सद्भाव का प्रतीक भी है। इस दिन लोग अपने पुराने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं और रंग-गुलाल लगाकर खुशियां बांटते हैं।
होली का संबंध पौराणिक कथा से भी जुड़ा है। कहा जाता है कि भक्त प्रह्लाद की भक्ति से क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को अग्नि में लेकर बैठ जाए। परंतु ईश्वर की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। इसी घटना की स्मृति में होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
होली के दिन बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी रंगों में सराबोर नजर आते हैं। ढोल-नगाड़ों की धुन पर लोग नाचते-गाते हैं और घर-घर जाकर मिठाइयाँ बांटते हैं। गुझिया, मालपुआ और ठंडाई जैसे विशेष व्यंजन इस त्योहार की शोभा बढ़ाते हैं।
आज के समय में हमें प्राकृतिक और सुरक्षित रंगों का प्रयोग करना चाहिए तथा पानी की बचत का भी ध्यान रखना चाहिए। होली हमें प्रेम, आनंद और एकता का संदेश देती है। यही इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है।
आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं 

Sunday, March 1, 2026

हेमवती नंदन बहुगुण गढ़वाल विश्वविद्यालय पीएच.डी. प्रवेश अधिसूचना 2025–26 जारी

🎓 पीएच.डी. प्रवेश अधिसूचना 2025–26 जारी
Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University (केंद्रीय विश्वविद्यालय), श्रीनगर (गढ़वाल), उत्तराखण्ड द्वारा शैक्षणिक सत्र 2025–26 के लिए पीएच.डी. कार्यक्रम में प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
📌 महत्वपूर्ण तिथियाँ:
🗓️ ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ: 01 मार्च 2026
🗓️ अंतिम तिथि: 15 मार्च 2026 (रात्रि 11:55 बजे तक)
📍 साक्षात्कार तिथि: संबंधित विभाग द्वारा निर्धारित
इच्छुक अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण, पात्रता मानदंड एवं विषयवार सीटों की जानकारी अवश्य देखें।
🔗 ऑनलाइन आवेदन हेतु: https://hnbguadm.samarth.edu.in/⁠

🌐 अधिक जानकारी: www.hnbgu.ac.in
उच्च शोध, अकादमिक उत्कृष्टता और नवाचार की दिशा में एक सशक्त कदम —
अभी आवेदन करें! ✨
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Friday, February 27, 2026

शिक्षा निदेशालय ने बुधवार को सीएम श्री स्कूलों की 6, 9 और 11वीं कक्षा में दाखिला प्रक्रिया को लेकर घोषणा कर दी है। इस साल कुल 75 सीएम श्री स्कूलों में दाखिले के लिए 27 फरवरी से आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी, जो कि रात 12 मार्च तक चलेगी

शिक्षा निदेशालय ने बुधवार को सीएम श्री स्कूलों की 6, 9 और 11वीं कक्षा में दाखिला प्रक्रिया को लेकर घोषणा कर दी है। इस साल कुल 75 सीएम श्री स्कूलों में दाखिले के लिए 27 फरवरी से आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी, जो कि रात 12 मार्च तक चलेगी

पूरी आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। शिक्षा निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट www.edudel.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
सरकार ने सीएम श्री स्कूलों में दाखिले को लेकर गाइडलाइंस भी जारी की हैं। इन स्कूलों में सिर्फ दिल्ली के रहने वाले बच्चे ही आवेदन कर सकते हैं। उपलब्ध सीटों में से 50 प्रतिशत सीटें सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए आरक्षित होंगी। इसके अलावा बाकी 50 प्रतिशत सीटों पर निजी स्कूलों के बच्चों को भी मेरिट के आधार पर दाखिला मिल सकता है।
शैक्षणिक सत्र 2025–26 में 5, 8 और 10वीं कक्षा में दिल्ली के मान्यता प्राप्त स्कूल पास होना चाहिए। सामान्य वर्ग के छात्रों को न्यूनतम 25 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होंगे, जबकि आरक्षित वर्ग में 5 प्रतिशत की राहत रहेगी। दाखिला मेरिट के आधार पर होगा। आवेदन फॉर्म भरते समय छात्रों को स्कूलों की चॉइस मिलेगी।
क्लास के बच्चे दो स्कूल और 9, 11वीं के स्टूडेंट 3 स्कूलों को विकल्प के तौर पर आवेदन फॉर्म में भर सकते हैं। हालांकि एक बार स्कूल आवंटित होने के बाद ट्रांसफर की अनुमति नहीं होगी।
शिक्षा विभाग के मुताबिक, 6 और 9वीं कक्षा की परीक्षा मार्च के अंतिम सप्ताह में आयोजित की जाएगी। वहीं, कक्षा 11 की परीक्षा मई 2026 में होने की संभावना है।
कक्षा 6 और 9 की प्रवेश प्रक्रिया 30 अप्रैल 2026 तक पूरी कर ली जाएगी।
OMR शीट आधारित इस परीक्षा में कक्षा 6 के लिए 300 नंबर के 75 प्रश्न होंगे, जबकि कक्षा 9 और 11 में दाखिले के लिए 400 अंक के 100 प्रश्न होंगे।

Thursday, February 26, 2026

साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में बीए, एलएलबी (ऑनर्स) और बीबीए एलएलबी (ऑनर्स) कोर्स शुरू किए हैं

साउथ एशियन यूनिवर्सिटी (SU) सार्क देशों की सरकारों द्वारा स्थापित यूनिवर्सिटी ने वर्ष 2026-27 सत्र के लिए कई नए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए हैं।

इस वर्ष यूनिवर्सिटी ने कुल 1610 सीटों पर प्रवेश खोला है। इसमें 50 पीएचडी छात्रवृत्ति सीटें, 780 स्नातक और 780 स्नातकोत्तर कार्यक्रमों की सीटें शामिल हैं। एसएयू के अध्यक्ष प्रो. केके अग्रवाल ने इसकी जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि अपने 16वें शैक्षणिक वर्ष में प्रवेश कर रही यूनिवर्सिटी ने स्नातक स्तर पर बीए, एलएलबी (ऑनर्स) और बीबीए एलएलबी (ऑनर्स) कार्यक्रम शुरू किए हैं।







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Wednesday, February 25, 2026

गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) के बीटेक प्रोग्राम में इस साल से सीयूईटी स्कोर से भी दाखिले होंगे

गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) के बीटेक प्रोग्राम में इस साल से सीयूईटी स्कोर से भी दाखिले होंगे। हालांकि दाखिले में यह स्कोर दूसरी प्राथमिकता पर रहेगा। बीटेक में दाखिले पहले राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा पर होंगे। यूनिवर्सिटी के तीन दर्जन से ज्यादा यूजी में दाखिले सीयूईटी स्कोर से भी होते हैं, प्राथमिकता पहले राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा या यूनिवर्सिटी से आयोजित परीक्षाओं को दी जाती है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने सीयूईटी यूजी के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को 26 फरवरी तक बढ़ा दिया है। ऐसे में आईपीयू की सलाह है कि जो छात्र सीयूईटी स्कोर से यूनिवर्सिटी के किसी स्नातक प्रोग्राम में दाखिला लेना चाहते हैं, वे सीयूईटी स्नातक के लिए आवेदन जरूर करें। सीयूईटी के अलावा कई पाठ्यक्रमों में प्रवेश राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं जैसे जेईई मेन, नीट, कैट, सीएमएटी, निमसेट, क्लैट के आधार पर भी होगा।

कुछ स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के लिए खाली सीटें कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट सीयूईटी के माध्यम से भरी जाएंगी। यूनिवर्सिटी ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रमों में दाखिले के लिए आवेदन प्रक्रिया दो फरवरी से ही शुरू की थी।

130 से अधिक संबद्ध कॉलेजों और विश्वविद्यालय स्कूलों में 43,000 से अधिक सीटों पर दाखिले के इच्छुक छात्र स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी के आवेदन कर सकते हैं।





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बीमार रहने के लिए छुट्टी चाहिए, या छुट्टी के लिए बीमार होना है?

हमारे देश में बीमारी भी बड़ी लोकतांत्रिक चीज़ है — यह कभी भी, कहीं भी, और किसी पर भी आ सकती है। लेकिन शिक्षण संस्थानों में तो बीमारी का स्वरूप कुछ अलग ही दिखाई देता है। यहाँ बीमारी अक्सर मौसम देखकर नहीं, बल्कि टाइम-टेबल देखकर आती है। और खास बात यह कि यह बीमारी छुट्टी के साथ ही ठीक भी हो जाती है।
कहावत है कि “स्वास्थ्य ही धन है”, पर कुछ लोग इसे इस तरह समझ बैठे हैं कि “छुट्टी ही स्वास्थ्य है।” इसलिए छुट्टी मिलते ही उनका स्वास्थ्य खिल उठता है, और काम दिखते ही तबीयत फिर से नाज़ुक हो जाती है।

बीमारी का वैज्ञानिक समय

अगर किसी फैकल्टी का पहला पीरियड सुबह 9 बजे हो, तो उसकी तबीयत रात 8 बजे से ही खराब होने लगती है। व्हाट्सऐप पर मैसेज आता है —
“सर, अचानक तेज बुखार है, आज नहीं आ पाऊँगा।”
और आश्चर्य देखिए, यही बुखार अगले दिन ठीक भी हो जाता है, खासकर तब जब उस दिन दो ही पीरियड हों या कोई मीटिंग न हो।
सबसे अद्भुत बीमारी तब आती है जब कॉलेज में कोई निरीक्षण, अतिरिक्त क्लास या पेपर-सेटिंग का काम हो। तब अचानक स्टाफ में वायरल का ऐसा प्रकोप फैलता है कि मेडिकल साइंस भी चकरा जाए। लगता है जैसे वायरस ने भी प्रशासन से मिलकर काम का कैलेंडर देख लिया हो।
डॉक्टर से ज़्यादा मजबूत मेडिकल सर्टिफिकेट
आजकल असली इलाज दवा से नहीं, मेडिकल सर्टिफिकेट से होता है। कुछ लोग इतने अनुभवी हो चुके हैं कि डॉक्टर से पहले ही बीमारी तय कर लेते हैं —
“डॉक्टर साहब, दो दिन का सर्टिफिकेट दे दीजिए, बाकी दवा मैं खुद ले लूँगा।”
डॉक्टर भी समझ जाते हैं कि यह बीमारी शरीर की कम, मन की ज्यादा है। पर क्या करें, मरीज की इच्छा सर्वोपरि है।

छुट्टी का गणित

शिक्षण संस्थानों में छुट्टी का गणित बड़ा रोचक है।
सोमवार को छुट्टी ले लो, तो रविवार मिलाकर लंबा वीकेंड।
शुक्रवार को छुट्टी ले लो, तो शनिवार-रविवार बोनस।
और अगर बीच में कोई त्योहार आ जाए, तो बीमारी की गंभीरता स्वतः बढ़ जाती है।
यह बीमारी इतनी समझदार होती है कि छुट्टी खत्म होते ही खुद ही ठीक हो जाती है। कोई टेस्ट नहीं, कोई रिपोर्ट नहीं — बस चमत्कार!

छात्रों का भी ज्ञान बढ़ता है

जब शिक्षक ही बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी लेते हैं, तो छात्र भी सीख जाते हैं कि बहाना बनाना भी एक कला है।
छात्र सोचते हैं —
“जब सर की तबीयत हर दूसरे शुक्रवार खराब हो सकती है, तो हमारी भी कभी-कभी हो ही सकती है।”
इस प्रकार शिक्षा केवल किताबों से नहीं, व्यवहार से भी मिलती है। और यह व्यवहार छात्रों को बहानेबाजी का पोस्ट-ग्रेजुएशन करा देता है।

काम का डर या आराम का प्यार?

असल सवाल यह है कि लोग सच में बीमार होते हैं या काम देखकर बीमार हो जाते हैं?
क्योंकि जब वही व्यक्ति स्टाफ रूम में बैठकर चाय पीता है, तो बिल्कुल स्वस्थ दिखता है, लेकिन जैसे ही अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलती है, उसकी कमर दर्द करने लगती है, सिर चकराने लगता है, और आँखों में अँधेरा छाने लगता है।
कई बार तो बीमारी का नाम भी बड़ा आधुनिक होता है —
“सर, माइग्रेन हो गया है।”
“सर, एलर्जी है।”
“सर, डॉक्टर ने आराम बताया है।”
डॉक्टर बेचारे सोचते होंगे कि हमने आराम की सलाह कब दी, पर उनका नाम तो लग ही जाता है।
ईमानदार लोग भी परेशान
सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को होती है जो सच में बीमार होते हैं।
जब वे छुट्टी लेते हैं, तो प्रशासन सोचता है —
“फिर वही बहाना!”
इस तरह बहानेबाजों की वजह से असली मरीजों की साख भी खराब हो जाती है।

प्रशासन की मजबूरी

प्रशासन भी क्या करे?
अगर छुट्टी मना कर दे तो मानवता पर सवाल, और छुट्टी दे दे तो काम पर असर।
इसलिए वह भी आधे मन से छुट्टी मंजूर कर देता है और मन ही मन सोचता है —
“काश, यह बीमारी छात्रों की पढ़ाई में भी थोड़ी गंभीर होती।”
समाधान क्या है?
समाधान बहुत कठिन नहीं है, बस थोड़ी ईमानदारी चाहिए।
अगर सच में बीमारी है तो आराम जरूरी है, लेकिन अगर छुट्टी ही चाहिए तो बीमारी का बहाना बनाना जरूरी नहीं।
कभी-कभी सच्चाई भी छुट्टी दिला सकती है —
“सर, थक गया हूँ, थोड़ा आराम चाहिए।”
कम से कम इससे मेडिकल साइंस को तो दोष नहीं देना पड़ेगा।

निष्कर्ष 

आज शिक्षण संस्थानों में बीमारी केवल स्वास्थ्य की समस्या नहीं रही, बल्कि छुट्टी का माध्यम बन चुकी है।
जब काम बढ़ता है तो बीमारी बढ़ती है, और जब जिम्मेदारी घटती है तो स्वास्थ्य लौट आता है।
इसलिए लगता है कि अब नया नारा होना चाहिए —
“स्वस्थ रहो या बीमार बनो, छुट्टी तो मिलनी ही चाहिए।”
पर सच तो यही है कि अगर शिक्षक ही जिम्मेदारी से भागने लगें, तो शिक्षा का स्वास्थ्य भी बीमार हो जाएगा।
और उस बीमारी का इलाज किसी डॉक्टर के पास नहीं, केवल कर्तव्यनिष्ठा के पास है।

Monday, February 23, 2026

कैंपस न्यूज: डॉ अखिलेश दास गुप्ता इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्ट्डीज (ADGIPS), बीबीडी समूह के अंतर्गत संचालित, नई दिल्ली, उत्कर्ष 2026 : “विरासत से विकास तक” थीम पर तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव का भव्य आयोजन किया गया


कैंपस न्यूज: डॉ अखिलेश दास गुप्ता इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्ट्डीज  (ADGIPS), बीबीडी समूह के अंतर्गत संचालित प्रतिष्ठित संस्थान, में 19 से 21 फरवरी तक तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव “उत्कर्ष 2026” का भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष के उत्सव की थीम “विरासत से विकास तक” रही, जिसका उद्देश्य भारतीय सांस्कृतिक धरोहर, विविधता और आधुनिक प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करने का संदेश देना था। कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और संस्थानों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ आभा वर्मानी , संयुक्त कुलसचिव, गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. वर्मानी ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को समझें तथा उन्हें आधुनिक सोच के साथ जोड़कर समाज के विकास में योगदान दें। उन्होंने कहा कि “कश्मीर से कन्याकुमारी तक अनेक भाषाएँ, परंपराएँ और संस्कृतियाँ होते हुए भी हम एक सूत्र में बंधे हैं। यही हमारी राष्ट्रीय पहचान की सबसे बड़ी शक्ति है।”
संस्थान के निदेशक डॉ निरंजन भट्टाचार्य  ने अपने स्वागत भाषण में कॉलेज की शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध गतिविधियों और नवाचार आधारित शिक्षा पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्थान में शोध और मौलिक चिंतन को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति तभी संभव है जब हम अपनी पहचान और ज्ञान परंपरा को समझते हुए नए विचारों को अपनाएँ। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना भी होना चाहिए।
तीन दिनों तक चले इस उत्सव में अनेक सांस्कृतिक, शैक्षणिक और मनोरंजनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें शास्त्रीय और आधुनिक नृत्य, समूह गीत, वाद्य प्रस्तुति, नाटक, फैशन शो, वाद-विवाद प्रतियोगिता, क्विज़, तकनीकी प्रदर्शनियाँ और स्टार्ट-अप आइडिया प्रस्तुति जैसे कार्यक्रम शामिल रहे। विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और कार्यक्रम परिसर उत्साह, रंग और ऊर्जा से भर गया।
उत्सव के दौरान परिसर में पारंपरिक और आधुनिक कला का अनूठा संगम देखने को मिला। मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल मनोरंजन ही नहीं बल्कि नेतृत्व, टीमवर्क और रचनात्मकता के अवसर प्रदान करना भी था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों की भी उपस्थिति रही, जिससे आयोजन का माहौल और अधिक जीवंत हो उठा।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मिस सोनाक्षी दास, उपाध्यक्ष, BBD Group उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने संस्थान के संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी तथा पुरस्कार विजेताओं को प्रमाण-पत्र और नकद पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर “स्टूडेंट ऑफ द ईयर”, विधि, प्रबंधन और बी.टेक. के उत्कृष्ट विद्यार्थियों को विशेष सम्मान भी दिया गया। उन्होंने विद्यार्थियों के उत्साह और परिश्रम की सराहना करते हुए सोमवार को अवकाश की घोषणा भी की।
निदेशक डॉ. भट्टाचार्य ने अपने धन्यवाद ज्ञापन में प्रबंधन, बीबीडी समूह, उपाध्यक्ष महोदया तथा सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्थान की गुणवत्ता में निरंतर सुधार में प्रबंधन का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और भविष्य में भी ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए जारी रहेंगे।
उत्सव के अंतिम दिन आयोजित स्टार नाइट कार्यक्रम ने पूरे समारोह को यादगार बना दिया। प्रसिद्ध गायिका Charu Semwal की प्रस्तुति ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनके लोकप्रिय गीतों और ऊर्जावान प्रस्तुति ने माहौल को उत्सवमय बना दिया और विद्यार्थियों ने देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लिया।
“उत्कर्ष 2026” ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कृति, रचनात्मकता और सामाजिक चेतना के साथ जुड़कर ही उसका वास्तविक अर्थ सामने आता है। संस्थान द्वारा आयोजित यह तीन दिवसीय उत्सव विद्यार्थियों के लिए सीखने, अभिव्यक्ति और संवाद का सशक्त मंच बना, जिसने उन्हें अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आगे बढ़ने का संदेश दिया।
इस प्रकार, “विरासत से विकास तक” की थीम को सार्थक रूप से साकार करते हुए ADGIPS का वार्षिकोत्सव सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ और सभी प्रतिभागियों के लिए अविस्मरणीय स्मृतियाँ छोड़ गया।
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Friday, February 20, 2026

धुंधली सच्चाई: निजी शिक्षण संस्थानों की चमकती तस्वीर

भारत में उच्च शिक्षा का क्षेत्र पिछले दो दशकों में  बहुत तेजी से बदला है। सरकारी संस्थानों की सीमित सीटों और बढ़ती जनसंख्या के कारण निजी कॉलेज, विश्वविद्यालय और संस्थानों का विस्तार हुआ। इन संस्थानों ने आधुनिक भवन, स्मार्ट क्लास, विदेशी सहयोग, 100% प्लेसमेंट और विश्वस्तरीय सुविधाओं के दावे करके विद्यार्थियों और अभिभावकों को आकर्षित किया। विज्ञापन, ब्रोशर और वेबसाइटों में सब कुछ अत्यंत आकर्षक दिखता है—परंतु जमीनी हकीकत अक्सर इन दावों से अलग होती है।

1. 100% प्लेसमेंट का दावा : आंकड़ों की बाज़ीगरी

आज अधिकांश निजी शिक्षण संस्थान अपने प्रचार में “100% प्लेसमेंट” को सबसे बड़ा हथियार बनाते हैं। परंतु इस दावे की वास्तविकता को समझना आवश्यक है। कई बार संस्थान अल्पकालिक इंटर्नशिप, कम वेतन वाली नौकरियों, या असंबंधित क्षेत्रों में नियुक्ति को भी प्लेसमेंट में शामिल कर लेते हैं। कई जगह विद्यार्थियों को केवल ऑफर लेटर दिखाकर प्लेसमेंट घोषित कर दिया जाता है, भले ही छात्र जॉइन न करे या कंपनी बाद में नियुक्ति रद्द कर दे।
कुछ संस्थानों में विद्यार्थियों को दबाव देकर छोटे स्टार्टअप या कॉल सेंटर जॉइन करवाए जाते हैं ताकि संस्थान का प्लेसमेंट प्रतिशत बना रहे। इस प्रकार प्लेसमेंट एक शिक्षा परिणाम नहीं बल्कि मार्केटिंग टूल बनकर रह गया है।

2. एक्रेडिटेशन और रैंकिंग की विश्वसनीयता पर सवाल

भारत में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कई संस्थाएं कार्यरत हैं, जैसे National Assessment and Accreditation Council, University Grants Commission और All India Council for Technical Education। इनका उद्देश्य शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता, शोध, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक व्यवस्था का मूल्यांकन करना है।
परंतु कई बार देखने में आता है कि A++, A+ या अन्य उच्च ग्रेड प्राप्त संस्थानों की वास्तविक स्थिति उस स्तर की नहीं होती। कागजों पर शोध, सुविधाएं, स्टाफ संख्या और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावशाली दिखती हैं, लेकिन वास्तविकता में संसाधनों का उपयोग सीमित या प्रतीकात्मक होता है।
कुछ संस्थान निरीक्षण से पहले अस्थायी रूप से उपकरण खरीद लेते हैं, अतिरिक्त फैकल्टी को अस्थायी रूप से नियुक्त कर लेते हैं या रिकॉर्ड तैयार कर लेते हैं। निरीक्षण समाप्त होते ही व्यवस्थाएं पहले जैसी हो जाती हैं। इससे यह प्रश्न उठता है कि क्या गुणवत्ता मूल्यांकन केवल दस्तावेज़ आधारित रह गया है?

3. उच्च फीस, कम वेतन – शिक्षा का व्यापारिक मॉडल

निजी संस्थानों की फीस लगातार बढ़ रही है। कई कॉलेज अपने शुल्क निर्धारण में सातवें वेतन आयोग, आधुनिक सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा का हवाला देते हैं। परंतु यही संस्थान अपने शिक्षकों और कर्मचारियों को उस स्तर का वेतन नहीं देते। फैकल्टी से अपेक्षा की जाती है कि वे शोध करें, प्रोजेक्ट लाएं, छात्रों को प्रशिक्षित करें, एडमिशन बढ़ाएं और संस्थान की छवि सुधारें, परंतु वेतन अक्सर न्यूनतम स्तर पर होता है। कई संस्थानों में वेतन समय पर नहीं मिलता, पीएफ या अन्य लाभ अधूरे रहते हैं और नौकरी की स्थिरता भी नहीं होती। इस असंतुलन का परिणाम यह होता है कि योग्य शिक्षक निजी संस्थानों से जल्दी बाहर निकल जाते हैं या केवल अनुभव लेने के लिए काम करते हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है, क्योंकि स्थायी और अनुभवी शिक्षकों का अभाव हो जाता है।

4. अनुबंध आधारित नियुक्ति : असुरक्षा का माहौल

आज अधिकांश निजी शिक्षण संस्थान स्थायी नियुक्तियों से बचते हैं। फैकल्टी और स्टाफ को अनुबंध पर रखा जाता है, जिसे कभी भी समाप्त किया जा सकता है। इसका प्रभाव दो स्तरों पर पड़ता है: शिक्षक अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित रहते हैं। वे संस्थान की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने से डरते हैं। जब शिक्षक स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाते, तब शिक्षा केवल औपचारिकता बन जाती है। शोध, नवाचार और अकादमिक स्वतंत्रता प्रभावित होती है। 

5. पुराने कर्मचारियों को हटाने की प्रवृत्ति 

कुछ संस्थानों में यह प्रवृत्ति देखी गई है कि जैसे ही कर्मचारी स्थायी लाभों—जैसे ग्रेच्युटी, प्रोविडेंट फंड या अन्य सुविधाओं—के पात्र होने लगते हैं, उन्हें किसी न किसी कारण से हटा दिया जाता है। यह न केवल कर्मचारी अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि संस्थान की नैतिकता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। शिक्षा संस्थान केवल ज्ञान देने के केंद्र नहीं होते, वे सामाजिक मूल्यों के प्रतीक भी होते हैं। यदि वहीं शोषण हो, तो समाज में गलत संदेश जाता है।

6. पढ़ाई से अधिक इवेंट मैनेजमेंट

आज कई निजी संस्थानों में शैक्षणिक गतिविधियों से अधिक ध्यान इवेंट्स, फेस्ट, सेमिनार और फोटो सेशन पर होता है। यह सही है कि सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां महत्वपूर्ण हैं, परंतु जब वे शिक्षा का स्थान ले लें, तब समस्या पैदा होती है। कई संस्थानों में शिक्षक का मूल्यांकन पढ़ाने से अधिक इस आधार पर होता है कि उन्होंने कितने कार्यक्रम आयोजित किए या सोशल मीडिया पर संस्थान की कितनी प्रचार सामग्री डाली। इससे शिक्षा की मूल भावना प्रभावित होती है। छात्र भी ज्ञान के बजाय प्रमाणपत्र और इवेंट अनुभव को अधिक महत्व देने लगते हैं।

7. गुणवत्ता बनाम लाभ – बदलता उद्देश्य

शिक्षा का मूल उद्देश्य समाज का बौद्धिक और नैतिक विकास है। परंतु कई निजी संस्थानों के लिए शिक्षा अब निवेश और लाभ का साधन बन गई है। जब शिक्षा व्यवसाय बनती है, तब छात्र ग्राहक बन जाते हैं, शिक्षक कर्मचारी बन जाते हैं और ज्ञान उत्पाद बन जाता है। इस मॉडल में गुणवत्ता से अधिक महत्व ब्रांड, विज्ञापन और प्रवेश संख्या को दिया जाता है।

8. छात्रों पर प्रभाव

इन परिस्थितियों का सबसे अधिक असर छात्रों पर पड़ता है। उन्हें महंगी शिक्षा मिलती है पर गुणवत्ता सीमित रहती है। प्लेसमेंट अनिश्चित रहता है। व्यावहारिक ज्ञान कम मिलता है। जब छात्र शिक्षा में निवेश करते हैं, तो वे भविष्य की उम्मीद भी करते हैं। यदि संस्थान केवल प्रमाणपत्र दे और कौशल न दे, तो यह युवाओं के साथ अन्याय है।

9. समाधान क्या हो सकते हैं?

इस स्थिति को सुधारने के लिए कई कदम आवश्यक हैं:
(1) पारदर्शी प्लेसमेंट रिपोर्ट संस्थानों को वेतन, कंपनी और भूमिका सहित वास्तविक प्लेसमेंट डेटा सार्वजनिक करना चाहिए।
(2) निरीक्षण की वास्तविक प्रक्रिया एक्रेडिटेशन संस्थाओं को आकस्मिक निरीक्षण, छात्र और शिक्षक फीडबैक तथा डिजिटल ट्रैकिंग का उपयोग करना चाहिए।
(3) शिक्षक अधिकारों की सुरक्षा स्थायी नियुक्ति, समय पर वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभ अनिवार्य किए जाने चाहिए।
(4) फीस और सुविधाओं का संतुलन यदि संस्थान उच्च फीस लेते हैं, तो उन्हें उसी स्तर की शिक्षा और वेतन व्यवस्था भी देनी चाहिए।
(5) शिक्षा को व्यवसाय नहीं, सामाजिक दायित्व मानना सरकार, समाज और शिक्षा क्षेत्र को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल लाभ न हो।

निष्कर्ष

निजी शिक्षण संस्थानों ने भारत में शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसमें कोई संदेह नहीं। परंतु जब शिक्षा केवल दिखावे, रैंकिंग और मुनाफे तक सीमित हो जाए, तब उसकी आत्मा खो जाती है। जरूरत इस बात की है कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिकता को पुनः स्थापित किया जाए। एक अच्छा संस्थान वह नहीं जो केवल A++ ग्रेड ले आए, बल्कि वह है जो अपने छात्रों को ज्ञान, अपने शिक्षकों को सम्मान और समाज को जिम्मेदार नागरिक दे सके।



Monday, February 16, 2026

10वीं एवं 12वीं के छात्र-छात्राओं को बोर्ड परीक्षाओं के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं

प्रिय 10वीं एवं 12वीं के छात्र-छात्राओं,

आपकी बोर्ड परीक्षाओं का समय आ गया है। यह वह महत्वपूर्ण अवसर है जब आप अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से अपने सपनों की दिशा तय करेंगे। याद रखिए, सफलता केवल प्रतिभा से नहीं बल्कि निरंतर प्रयास, अनुशासन और सकारात्मक सोच से मिलती है।
परीक्षा जीवन की अंतिम मंज़िल नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का एक पड़ाव है। इसलिए घबराएँ नहीं, बल्कि शांत मन से प्रश्नपत्र पढ़ें, समय का सही प्रबंधन करें और अपने ज्ञान पर विश्वास रखें। आपने पूरे वर्ष जो परिश्रम किया है, वही इस समय आपकी सबसे बड़ी शक्ति बनेगा।

सकारात्मक सोच रखें, पर्याप्त विश्राम लें और आत्मविश्वास बनाए रखें। कठिन प्रश्नों से घबराएँ नहीं, बल्कि धैर्य और समझदारी से उनका सामना करें। याद रखें — हर प्रयास आपको सफलता के एक कदम और निकट ले जाता है।

हमारी ओर से आप सभी को उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है कि आप अपने श्रेष्ठ प्रदर्शन से न केवल अपने परिवार और विद्यालय का नाम रोशन करेंगे, बल्कि अपने सपनों को भी नई उड़ान देंगे।

आप सभी को बोर्ड परीक्षाओं के लिए ढेर सारी शुभकामनाएँ।

सफलता आपके कदम चूमे और आपका भविष्य उज्ज्वल बने।

शुभकामनाओं सहित


Sunday, February 15, 2026

Friday, February 13, 2026

आज शिक्षण संस्थान केवल “इवेंट मैनेजमेंट” संस्थान बनते जा रहे हैं


वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। तकनीक, बाज़ारवाद और प्रतिस्पर्धा के इस दौर में शिक्षण संस्थानों की प्राथमिकताएँ भी परिवर्तित हुई हैं। जहाँ पहले विद्यालय और महाविद्यालय ज्ञानार्जन, चिंतन और चरित्र-निर्माण के केंद्र माने जाते थे, वहीं आज कई स्थानों पर वे “इवेंट मैनेजमेंट” संस्थानों की तरह दिखाई देने लगे हैं। वार्षिक उत्सव, सेमिनार, वेबिनार, सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्पोर्ट्स डे, फेस्ट और विभिन्न दिवसों के आयोजन इतनी अधिक संख्या में होने लगे हैं कि मूल शैक्षणिक उद्देश्य कहीं पीछे छूटता सा प्रतीत होता है।
निस्संदेह, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं। वे आत्मविश्वास बढ़ाती हैं, नेतृत्व क्षमता विकसित करती हैं और सामाजिक कौशल को सुदृढ़ बनाती हैं। परंतु जब इन गतिविधियों का अनुपात इतना बढ़ जाए कि कक्षाओं का समय कम हो जाए, शिक्षकों पर केवल आयोजन की जिम्मेदारी आ जाए और अध्ययन-अध्यापन गौण हो जाए, तब यह चिंता का विषय बन जाता है। कई बार देखा गया है कि किसी निरीक्षण, मान्यता या प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यक्रमों की भरमार कर दी जाती है। मंच सजता है, फोटो और वीडियो बनते हैं, सोशल मीडिया पर प्रचार होता है, परंतु विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता।
आज शिक्षा भी एक प्रतिस्पर्धी बाजार का हिस्सा बन चुकी है। संस्थान अपनी “ब्रांडिंग” के लिए आकर्षक कार्यक्रमों और बड़े-बड़े आयोजनों पर जोर देते हैं। बाहरी व्यक्तित्वों को बुलाकर भव्य कार्यक्रम किए जाते हैं ताकि संस्थान की छवि चमके। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या इससे विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता और विषय-ज्ञान में वास्तविक वृद्धि हो रही है? कई बार आयोजन की तैयारी में शिक्षक और छात्र इतने व्यस्त हो जाते हैं कि नियमित पाठ्यक्रम प्रभावित हो जाता है। असाइनमेंट, प्रायोगिक कार्य और शोध गतिविधियाँ पीछे छूट जाती हैं।
एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लगातार आयोजनों का दबाव शिक्षकों और कर्मचारियों पर मानसिक तनाव भी बढ़ाता है। उन्हें अपने मूल कार्य के अतिरिक्त मंच संचालन, अतिथि स्वागत, सजावट, प्रबंधन और रिपोर्टिंग जैसे कार्य करने पड़ते हैं। इससे उनकी ऊर्जा और समय का बड़ा भाग प्रशासनिक गतिविधियों में खर्च हो जाता है। परिणामस्वरूप, शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
यह भी सत्य है कि आधुनिक शिक्षा में प्रस्तुतीकरण और व्यवहारिक अनुभव का महत्व बढ़ा है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि शिक्षा केवल दिखावे तक सीमित रह जाए। वास्तविक शिक्षा वह है जो विद्यार्थियों में चिंतनशीलता, नैतिकता और शोध की प्रवृत्ति उत्पन्न करे। यदि संस्थान केवल प्रमाणपत्र, फोटो और सोशल मीडिया पोस्ट तक सिमट जाएँ, तो शिक्षा का मूल उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाएगा।
समाधान यह है कि शिक्षण संस्थान संतुलन बनाएँ। सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ अवश्य हों, परंतु वे पाठ्यक्रम और शैक्षणिक गुणवत्ता के पूरक बनें, प्रतिस्थापक नहीं। शिक्षकों को उनके मूल कार्य—पठन-पाठन और मार्गदर्शन—पर केंद्रित रहने दिया जाए। प्रशासन को भी यह समझना होगा कि संस्थान की वास्तविक पहचान उसके परिणामों, शोध कार्यों और विद्यार्थियों के नैतिक विकास से बनती है, न कि केवल भव्य आयोजनों से।
अंततः, शिक्षा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है। यदि हम इसे आयोजन-प्रधान बना देंगे, तो ज्ञान की गहराई और गंभीरता खोने का खतरा रहेगा। इसलिए आवश्यक है कि शिक्षण संस्थान अपनी मूल भावना—ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व विकास—को केंद्र में रखें और आयोजनों को उसी के अनुरूप सीमित एवं सार्थक बनाएं।

Friday, February 6, 2026

NTA ने UGC-NET दिसंबर 2025 का रिजल्ट जारी

NTA ने UGC-NET दिसंबर 2025 का रिजल्ट जारी कर दिया है। इसके लिए 9.93 लाख रजिस्ट्रेशन हुए थे। 7.35 लाख स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी। एनटीए ने सब्जेक्ट और कैटेगरी के हिसाब से कटऑफ मार्क्स भी जारी किए हैं।
सब्जेक्ट और कैटेगरी के हिसाब से कटऑफ भी जारी किए गए हैं।
जारी किए हैं। जेआरएफ और असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए, 5108 कैंडिडेट्स क्वालिफाई हुए हैं। पीएचडी में एडमिशन और असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति के लिए तय की गई कैटेगरी में 54713 कैंडिडेट्स क्वालिफाई हुए हैं। तीसरी कैटेगरी में 117058 कैंडिडेट्स ने एग्जाम क्लियर किया है।


Wednesday, February 4, 2026

भारतीय प्रबंधन संस्थान, इंदौर प्रबंधन में 5 वर्षीय एकीकृत कार्यक्रम बैच 2026-30

भारतीय प्रबंधन संस्थान, इंदौर प्रबंधन में 5 वर्षीय एकीकृत कार्यक्रम बैच 2026-30

Thursday, January 29, 2026

गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एडमिशन के लिए अपना पोर्टल 2 फरवरी 2026 से खोलेगी

गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) शैक्षणिक सत्र 2026-27 के एडमिशन के लिए अपना पोर्टल 2 फरवरी से खोलेगी। यूनिवर्सिटी अपने अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट, पीएचडी समेत कई कोर्सों की 42 हजार से ज्यादा सीटों पर दाखिले करेगी।
इस नए सत्र में 24 नए कोर्स शुरू कर रही है और 9 इंस्टीट्यूट (पांच प्राइवेट, चार सरकारी) इसके साथ अलग-अलग कोर्सों के लिए एफिलिएशन ले रहे हैं। ऐसे आवेदन अप्रैल–मई में होंगे।

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बुधवार को अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट, पीएचडी का एडमिशन ब्रोशर लॉन्च किया।
उन्होंने कहा कि पहले बजट में हमने 500 करोड़ रुपये दिए थे, लेकिन जरूरतों को देखते हुए दिल्ली सरकार ने इसे 1300 करोड़ रुपये कर दिया है। यह दिल्ली को इंटेलेक्चुअल कैपिटल बनाने के लिए निवेश है। सरकार विज़न और निवेश के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है।

यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. महेश वर्मा ने बताया कि इस साल 37419 UG, 5316 PG समेत 22 ब्रांच में PhD कोर्सों में दाखिले होंगे। इसके अलावा इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए सुपरन्यूमेररी सीटें हैं। अभी हमारे पास 32 देशों से स्टूडेंट्स हैं, जिनमें अफ्रीकी और सार्क देशों से हैं। 85% सीटें दिल्लीवालों के लिए आरक्षित हैं।

कई कोर्सों में दाखिले नेशनल लेवल के एग्जाम जैसे CAT, NEET, CLAT, NIMCET, CEED, CMAT स्कोर पर होंगे। वहीं कई कोर्सों के लिए यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) अप्रैल–मई में रखे जाएंगे। कुछ कोर्सों के लिए हमने एक-दो नहीं, कई एग्जाम मोड शामिल किए हैं। जैसे बीटेक की सीटें हम पहली बार CUET से भी भरेंगे। ESIC मेडिकल कॉलेज इस साल IP यूनिवर्सिटी से जुड़ रहा है।

VC ने बताया कि पिछले साल 35 हजारसे ज्यादा स्टूडेंट्स को एडमिशन मिले और नया रिकॉर्ड बना। IPU ने पिछले साल अपना पहला इंटरनेशनल कैंपस घाना का उद्घाटन किया था। प्रो. महेश वर्मा का कहना है कि इस साल इसे शुरू कर दिया जाएगा।
ऑफशोर कैंपस में टीचर एजुकेशन, मैनेजमेंट स्टडीज, AI, डेटा साइंस, रोबोटिक्स कोर्स हाइब्रिड मोड में चलाए जाएंगे। वहीं IPU के तीसरे कैंपस – नरेला की 23.23 एकड़ जमीन 10 दिन पहले हैंडओवर की गई है, मगर नरेला हब में सरकारी लैंड के इस्तेमाल को लेकर पॉलिसी बन रही है, तो अभी इंतजार है।


UGC के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, 19 मार्च को होगी मामले की अगली सुनवाई


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर पूरे देशभर में जबरदस्त विरोध हो रहा है। नए नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सुनवाई हुई है। 

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला किया है और यूजीसी के नियम पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस मामले में अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की गई है।

23 जनवरी, 2026 को यूजीसी की ओर से उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना के लिए नई गाइडलाइंस को अधिसूचित किया गया था।


क्या था पूरा मामला?

विभिन्न याचिकाकर्ताओं ने यूजीसी के नए नियम को मनमाना, बहिष्करणकारी, भेदभावपूर्ण और संविधान के साथ-साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी थी। यूजीसी के नए नियम के विरोध करने वालों का कहना है कि इस एक्ट में भेदभाव की जो परिभाषा दी गई है उससे ऐसा लगता जैसे जातिगत भेदभाव सिर्फ  SC, ST और OBC के साथ ही होता है। सामान्य वर्ग के छात्रों को ना तो कोई संस्थागत संरक्षण दिया गया है, ना ही उनके लिए कोई ग्रीवेंस रिड्रेस सिस्टम की व्यवस्था है। पिटीशनर्स ने कहा है कि वैसे तो इस एक्ट को समानता बढ़ाने के लिए लाया गया है, लेकिन ये खुद भेदभाव बढ़ाता है। इसमें सामान्य वर्ग यानी सवर्णों को 'नेचुरल ऑफेंडर' माना गया है। इसलिए इसकी समीक्षा होनी चाहिए और जब तक सुप्रीम कोर्ट इस पर फैसला नहीं करता तब तक नए एक्ट इंप्लीमेंटेशन पर रोक लगनी चाहिए।



CM SHRI Schools Admission 2026: आवेदन की अंतिम तिथि 25 मार्च तक बढ़ी

नई दिल्ली। शिक्षा विभाग ने CM SHRI Schools Admission 2026 के तहत कक्षाओं VI, IX और XI में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी ह...

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(Gateway of Admission) : "Bharat Admission Portal एक विश्वसनीय शैक्षणिक ब्लॉग है जहाँ आपको भारत भर के स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित एडमिशन नोटिफिकेशन, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, महत्वपूर्ण तिथियाँ, मेरिट लिस्ट, रिजल्ट और काउंसलिंग जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाती है। हमारा उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों को सही, ताज़ा और प्रमाणिक जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर प्रदान करना है, ताकि वे अपने शैक्षणिक भविष्य से जुड़े सही निर्णय ले सकें।"

Latest News GGSIPU ने 2 फरवरी, 2026 को IPU CET 2026 के लिए आवेदन पत्र जारी कर दिया है। IPU CET 2026 के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 मार्च, 2026 है। इच्छुक उम्मीदवार IPU विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए पंजीकरण लिंक पर क्लिक करके आवेदन कर सकते हैं।...