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Friday, October 31, 2025

CBSE की 10 वीं और 12 वीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी 2026 से शुरू होंगी

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी 2026 से शुरू होंगी। बोर्ड ने परीक्षा से 110 दिन पहले गुरुवार को डेटशीट जारी कर दी।

दसवीं की परीक्षाएं 17 फरवरी से 10 मार्च तक और 12वीं की 17 फरवरी से 9 अप्रैल तक आयोजित की जाएंगी। परीक्षाएं विषयों के अनुसार सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे और दोपहर 1:30 बजे तक आयोजित की जाएंगी।

सीबीएसई ने कहा कि डेटशीट तैयार करते हुए खास बात का ध्यान रखा गया है कि दोनों कक्षाओं में विद्यार्थियों द्वारा सामान्य लिए जाने वाले दो विषयों के बीच पर्याप्त अंतराल हो। साथ ही 12वीं के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की जाने वाली प्रवेश परीक्षाओं की तिथियों को भी ध्यान में रखा गया है।

CBSE के अनुसार, बोर्ड की परीक्षाएं इन प्रवेश परीक्षाओं से काफी पहले ही समाप्त करने का प्रयास किया गया है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट https://www.cbse.gov.in/ पर ली जा सकती है।




Wednesday, October 29, 2025

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय को निर्देश दिया है कि शिक्षक भर्ती (प्राथमिक) की चल रही प्रक्रिया में अधिक आयु के अभ्यर्थियों को भी आवेदन करने की अनुमति दी जाए। साथ ही यह पंजीकरण ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरह से किया जाए

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय को निर्देश दिया है कि शिक्षक भर्ती (प्राथमिक) की चल रही प्रक्रिया में अधिक आयु के अभ्यर्थियों को भी आवेदन करने की अनुमति दी जाए। साथ ही यह पंजीकरण ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरह से किया जाए।

45 याचिकाकर्ताओं ने अधिकतम आयु सीमा को लेकर 10 सितंबर को डीईओएसएसएसबी की विज्ञापन को इस आधार पर चुनौती दी थी कि उम्र सीमा बढ़ाई नहीं गई, जबकि भर्ती प्रक्रिया अप्रैल 2021 में शुरू होनी थी, लेकिन कोविड के कारण देर से शुरू हुई।

डीईओएसएसएसबी ने इस विज्ञापन को मई 2021 में निकाला, इसलिए अभ्यर्थियों ने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया समय पर होती, तो वे अधिकतम आयु सीमा में आते।

अब केट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक विलंब का खामियाजा अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए।

सैकड़ों युवाओं को फायदा
यह फैसला भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे सैकड़ों उम्मीदवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। केट ने यह स्पष्ट किया कि प्रशासनिक देरी के कारण अभ्यर्थियों को बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

नई दिल्ली के अन्य शिक्षा संस्थानों में लंबित आयु-सीमा मामलों पर भी प्रभाव डाल सकता है।

अभ्यर्थियों के लिए प्रक्रिया सुगम बनाएं
केट ने डीईओएसएसएसबी व शिक्षा निदेशालय को निर्देश दिया है कि वे आवेदन की प्रक्रिया अभ्यर्थियों के लिए आसान बनाएं। ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन की अनुमति दें।

मामले की अगली सुनवाई नवंबर में होगी। तब तक आवेदन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।


Tuesday, October 28, 2025

Online Applications / Proposal are invited for Grant of Provisional Affiliation / Revalidation of Continuation of Provisional Affiliation for the Academic Year 2026-27 as per existing policy guidelines of Govt. Of NCT of Delhi.

Online Applications / Proposal are invited for Grant of Provisional Affiliation / Revalidation of Continuation of Provisional Affiliation for the Academic Year 2026-27 as per existing policy guidelines of Govt. Of NCT of Delhi. 


The online portal for submitting application / proposal shall be open from 3rd November 2025. 

  • Last Date for online submission for Medical, Para Medical & Nursing Programmes - 17th November 2025 
  • Last Date for Physical Submission - 20th November 2025 

  • Last Date for online submission for Other Programes - 28th November 2025 
  • Last Date for Physical Submission - 2nd December 2025 



Tuesday, October 21, 2025

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।  दीपोत्सव आप सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए, आप सभी स्वस्थ रहें।

Tuesday, October 14, 2025

साउथ एशियन यूनिवर्सिटी, दिल्ली की एक छात्रा के साथ कथित यौन उत्पीड़न के मामले ने विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मचा

नई दिल्ली स्थित दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय (South Asian University) की एक छात्रा के साथ कथित यौन उत्पीड़न के मामले ने विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है, वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी एक चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। 

घटना 12 अक्टूबर रविवार को विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम के पास हुई जिसको लेकर जानकारी के मुताबिक मैदानगढ़ी थाने में दोपहर करीब 3 बजे पीसीआर को जानकारी कॉल के माध्यम से दी गई। यह कॉल छात्रा के एक परिचित व्यक्ति ने की थी। दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त (DCP) अंकित चौहान मौके पर पहुचे। 

 यूनिवर्सिटी के सूत्रों के मुताबिक फिलहाल छात्रा को काउंसलिंग के लिए भेजा गया है और उसका मेडिकल परीक्षण भी करवाया गया है। साथ ही छात्रा ने देर शाम तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया था। 

यूनिवर्सिटी प्रशासन का जांच में सहयोग का दावा

विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि प्रशासन पूरी तरह पुलिस जांच में सहयोग कर रहा है और इस मामले में पारदर्शिता रखी जाएगी। इसके तहत विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए  एक चार सदस्यीय समिति बनाई है। इस समिति की अध्यक्षता प्रोफेसर संजय चतुर्वेदी कर रहे हैं।कल्पना उज्जैनवाला को समिति की सचिव बनाया गया है, जबकि रितु गौड़ और कविता खन्ना इसके सदस्य हैं। समिति को 10 दिनों  के अंदर डिटेल रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। 

घटना को लेकर यूनिवर्सिटी छात्रों में रोष

इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद सोमवार शाम करीब 6 बजे बड़ी संख्या में छात्र विश्वविद्यालय परिसर में इकट्ठा हुए और प्रशासनिक भवन के बाहर धरना प्रदर्शन किया। छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने मामले में कार्रवाई में देरी की और विश्वविद्यालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग की है कि पीड़ित छात्रा को न्याय मिले और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई कार्रवाई की जाए। 

यूनिवर्सिटी प्रशासन का छात्रों की सुरक्षा का दावा

इस बीच, विश्वविद्यालय के पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर (PRO) ने बयान जारी करते हुए कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह से जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है। हम सभी छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। 

अभी इस मामले में जांच जारी है और छात्रा के बयान के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय के परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर रही है। 




Monday, October 13, 2025

स्कूल फीस बढ़ोतरी पर सरकार का हस्तक्षेप सिर्फ मुनाफाखोरी या अवैध वसूली मामलों तक सीमित

दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ किया कि शिक्षा विभाग के पास गैर-सहायता प्राप्त (प्राइवेट) स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस को रेगुलेट करने का अधिकार है। हालांकि, ऐसी पावर या अधिकार व्यवसायीकरण, मुनाफाखोरी और कैपिटेशन फीस वसूलने में शामिल होने से रोकने के उपायों से आगे नहीं बढ़ सकते। 

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच के फैसले के मुताबिक, ऐसा नहीं है कि स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस को सरकार रेगुलेट नहीं कर सकती।

कैपिटेशन फीस वसूलने में लिप्त न हों

रेगुलेट करने की इजाजत केवल यह सुनिश्चित करने के लिए है कि ऐसे स्कूल मुनाफाखोरी या शिक्षा के व्यवसायीकरण या कैपिटेशन फीस वसूलने में लिप्त न हों। कोर्ट ने कहा कि इसे रेगुलेट करने के लिए सरकार जो भी तरीके अपनाए, उसके जरिए यह तय करना होगा कि प्राइवेट स्कूल अपने लाभ सरप्लस का इस्तेमाल शैक्षणिक संस्थान के फायदे के अलावा किसी अन्य काम के लिए न करें। फीस स्ट्रक्चर वहां मौजूद बुनियादी ढांचे और अन्य सुविधाओं, टीचरों और कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन और संस्थान के विस्तार या बेहतरी से जुड़ी भावी योजनाओं को ध्यान में रखते हुए तय किया जाना चाहिए।

स्कूल के खिलाफ की जा सकती है कार्रवाई

डिविजन बेंच ने संबंधित मुद्दे पर अपनी सिंगल बेंच के 7 फरवरी 2024 को सुनाए गए फैसले से पूरी सहमति जताई। उसे चुनौती देने वाली अपीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, हम सिंगल बेंच के फैसले से पूरी तरह सहमत है कि किसी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूल द्वारा ली जाने वाली फीस को तय करने में शिक्षा विभाग के दखल का दायरा उस मामले तक सीमित है, जिसमें स्कूल कैपिटेशन फीस वसूलने में या मुनाफाखोरी में शामिल है। ऐसे में, स्कूलों द्वारा दाखिल की जाने वाली फीस डिटेल की जांच करने पर शिक्षा विभाग को यह पाता चलता है कि स्कूलों द्वारा जमा राशि का खर्च डीएसईए, 1973 या उसके अंतर्गत बनाए गए प्रावधानों के अनुसार नहीं है, तो स्कूल के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सकती है।

फीस वापस करने का निर्देश देने का है अधिकार

मौजूदा मामले में ब्लूबेल्स स्कूल इंटरनेशनल के कुछ बच्चों के पैरंट्स और शिक्षा निदेशालय ने सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थीं। शिक्षा निदेशालय की एक अपील लीलावती मंदिर सीनियर सेकंडरी स्कूल से जुड़ी थी। डिविजन बेंच को यह तय करना था कि क्या शिक्षा विभाग के पास जरूरी अधिकार या पावर है कि वह निजी तौर पर संचालित और गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को डीएसईए, 1973 की धारा 17(3) और 18(4) में निहित प्रावधानों के अनुसार अपनी फीस बढ़ाने से रोक सके। अगर ऐसे किसी स्कूल ने पहले ही फीस बढ़ा दी हो, तो क्या शिक्षा विभाग को स्कूल को स्टूडेंट्स से ली जाने वाली अधिकतम फीस से ज्यादा ली गई फीस वापस करने का निर्देश देने का अधिकार है।




बच्चों को यौन शिक्षा 9 वीं कक्षा से नहीं, बल्कि छोटी उम्र से ही दी जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा है कि बच्चों को यौन शिक्षा 9 वीं कक्षा से नहीं, बल्कि छोटी उम्र से ही दी जानी चाहिए। 

न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में यौन शिक्षा पाठ्यक्रम का हिस्सा होनी चाहिए, ताकि युवा किशोरों को यौवन के साथ आने वाले हार्मोनल परिवर्तनों के बारे में जागरूक किया जा सके। 

पीठ ने कहा, "हमारा मानना ​​है कि बच्चों को छोटी उम्र से ही यौन शिक्षा दी जानी चाहिए, न कि 9 वीं कक्षा से। संबंधित अधिकारियों को अपने विवेक का प्रयोग करके सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए, ताकि बच्चों को यौवन के बाद होने वाले परिवर्तनों और उनसे संबंधित सावधानियों के बारे में जानकारी मिल सके।"


शीर्ष अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) और 506 (आपराधिक धमकी) तथा यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धारा 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न) के तहत अपराधों के आरोपी 15 वर्षीय किशोर को ज़मानत देते हुए ये टिप्पणियां की है। 


शीर्ष अदालत ने इससे पहले किशोर न्याय बोर्ड द्वारा तय की जाने वाली शर्तों के अधीन उसे ज़मानत पर रिहा करने का निर्देश दिया था, यह देखते हुए कि वह नाबालिग है। 

गौर करें तो सेक्स एजुकेशन को लेकर हमेशा से ही डिबेट होता रहा है। हालांकि यह एक ऐसा सब्जेक्ट है जिसको लेकर समाज में लंबे समय से विवाद होता रहा है, इतना ही नहीं ये उपेक्षित भी रहा है। 


यौन शिक्षा बच्चों और युवाओं के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए बेहद जरूरी है। यह शिक्षा न केवल बच्चों को उनके शरीर और संबंधों के बारे में जागरूक बनाती है, बल्कि उन्हें सुरक्षित और हेल्दी जीवन जीने में मदद करती है। एक्सपर्ट से जानिए सेक्स एजुकेशन क्यों जरूरी और बच्चों को कब से देनी चाहिए?


बता दें कि पॉक्सो एक्ट तब लागू होता है कि जब कोई नाबालिग के साथ यौन शोषण होता है। इस घटना तत्काल एफआईआर दर्ज होती है। इतना ही नहीं आरोपी को बिना डिटेल इंकवॉरी के गिरफ्तार कर लिया जाता है। 

इस कानून में जमानत मिलना बड़ा ही मुश्किल होता है। ऐसे में यदि आरोप झूठा हो, तो आरोपी की सामाजिक प्रतिष्ठा खाक में मिल जाती है। उसकी मानसिक स्थिति और पारिवारिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

कई बार ये पाया गया है कि पारिवारिक दुश्मनी, प्रेम संबंधों में असहमति में भी इस तरह के केस सामने आते हैं। जमीन-जायदाद के विवाद में भी पॉक्सो एक्ट का बदले की भावना के तहत इस्तेमाल किया जाता है। इससे कानून की गरिमा पर असर पड़ता है, इसके साथ ही न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता में भी कमी आती है। 

बता दें कि POCSO Act (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेन्स एक्ट) को हिंदी में बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम कहा जाता है। इस कानून को साल 2012 में नाबालिग बच्चे-बच्चियों की के लिए लाया गया था। पॉक्सो एक्ट के तहत दोषियों के खिलाफ कड़े सजा का प्रावधान है। अपराधियों को बमुश्किल जमानत मिल पाती है। 




Friday, October 10, 2025

देश की सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को अपनी वेबसाइट इस तरह से बनानी होगी, जिससे छात्र और अभिभावकों को सभी ज़रूरी जानकारियां आसानी से एक ही जगह पर मिल सकें: UGC

देश की सभी यूनिवर्सिटी, इंस्टीट्यूट और कॉलेजों को अपनी वेबसाइट इस तरह से बनानी होगी, जिससे छात्र और अभिभावकों को सभी ज़रूरी जानकारियां आसानी से एक ही जगह पर मिल सकें। यूनिवर्सिटी, कॉलेज की वेबसाइट स्टूडेंट फ्रेंडली होनी चाहिए।

 UGC ने जारी किया आदेश। UGC ने कहा है कि यूनिवर्सिटी की वेबसाइट के होम पेज पर सिंगल डॉक्युमेंट के ज़रिए सभी महत्वपूर्ण जानकारियां मिल जानी चाहिए।

UGC ने 2024 में इस संबंध में गाइडलाइंस जारी की थीं, लेकिन कई यूनिवर्सिटीज़ ने इन दिशानिर्देशों के अनुसार वेबसाइट तैयार नहीं की।

अब UGC ने एक बार फिर पुनः नया आदेश जारी कर कहा है कि प्रत्येक यूनिवर्सिटी की वेबसाइट के होम पेज पर ही सभी जरूरी जानकारी होनी चाहिए — जैसे कि:

ऑफर किए जाने वाले कोर्सेज़
फीस स्ट्रक्चर
रैंकिंग
टीचर्स की डिटेल्स
एडमिशन प्रक्रिया

सारी जानकारी एक ही पेज पर मिलनी चाहिए ताकि छात्र आसानी से हर जानकारी पा सकें।

कई यूनिवर्सिटीज़ की वेबसाइट पर पाई गई कमियाँ:

UGC के सामने कई यूनिवर्सिटीज़ की वेबसाइट की कमियाँ सामने आईं, जिसके बाद UGC को यह आदेश दोबारा जारी करना पड़ा।

UGC ने कहा कि यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर एकेडमिक प्रोग्राम्स, एडमिशन गाइडलाइंस, टीचिंग स्टाफ, स्टूडेंट सपोर्ट सर्विसेज़ (जैसे हॉस्टल, स्कॉलरशिप, ई-संपर्क पोर्टल आदि) की जानकारी स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए।

UGC ने 3 अक्टूबर को जारी अपने आदेश में कहा है कि यूनिवर्सिटी के NAAC स्टेटस, मान्यता और रैंकिंग की जानकारी भी वेबसाइट पर उपलब्ध होनी चाहिए।























Friday, October 3, 2025

NIRF रैंकिंग में अब जल्दी ही निगेटिव मार्किंग भी शामिल की जाएगी

नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) में जल्द बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब तक केवल पॉजिटिव वेटेज के आधार पर रैंकिंग दी जाती थी, लेकिन जल्दी ही निगेटिव मार्किंग भी शामिल की जाएगी। 

यह व्यवस्था विशेष रूप से उन संस्थानों पर लागू होगी जिनके रिसर्च पेपर रिट्रैक्ट किए गए हैं या जिनके कार्य में भ्रामक उद्धरण और डेटा की गड़बड़ी पाई गई है।

शीघ्र सार्वजनिक किए जाएंगे ड्राफ्ट नियम

No No लब है कि NIRF रैंकिंग के दसवें संस्करण की रैंकिंग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जारी की थी। संस्थान के इतिहास में इससे पहले निगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं रहा है। 

नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रेडिटेशन (NBA) के चेयरमैन अनिल सहस्रबुद्धे ने बताया कि पहली बार एनआईआरएफ अपने मूल्यांकन में दंडात्मक प्रावधान शामिल करने जा रहा है। उनके अनुसार, "रिसर्च में कदाचार और डेटा में हेरफेर रोकने के लिए यह कदम जरूरी है। ड्राफ्ट नियम जल्द ही सार्वजनिक किए जाएंगे।"

अभी इन पांच मानकों के आधार पर मिलती है रैंकिंग

एनआईआरएफ अभी संस्थानों को पांच प्रमुख मानकों पर परखता है -

टीचिंग और लर्निंग
ग्रेजुएशन आउटकम
रिसर्च
आउटरीच
परसेप्शन

2024 साइकिल में इसमें 8,700 से अधिक संस्थानों ने भाग लिया था। इन नतीजों को छात्र, भर्ती एजेंसियां और नीति निर्माता एक अहम पैमाने के रूप में देखते हैं।

पिछले कुछ वर्षों में कई संस्थानों से बड़ी संख्या में रिसर्च पेपर वापस लिए गए हैं। इस कारण उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। अब तक, रिट्रैक्टेड पेपरों का असर रैंकिंग पर नहीं पड़ता था, जिससे कुछ संस्थान उच्च रैंक हासिल कर लेते थे।

इस मुद्दे को हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) में भी उठाया गया था। याचिका मे आरोप लगाया गया था कि NIRF रैंकिंग केवल संस्थानों द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित होती है बिना किसी स्वतंत्र सत्यापन या ऑडिट के

हालांकि केंद्र सरकार ने दखल देकर कोर्ट को आश्वस्त किया कि NIRF वैज्ञानिक तरीके से रैंकिंग जारी करता है, जिसके बाद रोक हटा दी गई।


Thursday, October 2, 2025

विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं

बुराई पर अच्छाई की जीत, असत्य पर सत्य की जीत, अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं

दिल्ली विश्वविद्यालय ने NCWEB की पहली कट-ऑफ सूची जारी, 28 जुलाई से शुरू होगी ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नॉन-कॉलेजिएट विमेन एजुकेशन बोर्ड (NCWEB) के अंतर्गत संचालित बी.ए. (प्रोग्राम) ...

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Latest News दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के नॉन-कॉलेजिएट विमेन्स एजुकेशन बोर्ड (NCWEB) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के स्नातक प्रवेश का कार्यक्रम जारी कर दिया है। ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया 8 जुलाई 2026 से शुरू होकर 24 जुलाई 2026 तक चलेगी...