सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा, कई सरकारी और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी की खबरों को ध्यान में रखते हुए, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी रिक्त संकाय पदों (शिक्षण और गैर-शिक्षण दोनों) को चार महीने के भीतर भरा जाए। शीर्ष अदालत ने छात्र हित में देश भर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए बृहस्पतिवार को व्यापक दिशा निर्देश जारी किए। कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश यह दिया कि देश भर के उच्च शिक्षण संस्थान किसी भी छात्र की आत्महत्या या अप्राकृतिक मृत्यु की सूचना तत्काल पुलिस को देंगे।
बृहस्पतिवार 15 जनवरी, 2026 को उच्च शिक्षण संस्थानों के बारे में व्यापक निर्देश जारी करते हुए जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा, सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समग्र रूप से सुरक्षित, समान, समावेशी और शिक्षा के अनुकूल वातावरण होना चाहिए। यह इन संस्थानों का मूलभूत कर्तव्य है और वे इससे पीछे नहीं हट सकते।
छात्रों की आत्महत्या को छात्रों की पीड़ा और कल्याण से जुड़ी एक विशाल समस्या का मात्र एक छोटा सा हिस्सा मानते हुए, शीर्ष अदालत ने कहा कि कुलपति, रजिस्ट्रार और अन्य महत्वपूर्ण संस्थागत एवं प्रशासनिक पदों पर रिक्तियों की नियुक्ति और उन्हें भरना चार महीने के भीतर किया जाना चाहिए। इसके अलावा, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उच्च शिक्षा संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए इन पदों को रिक्ति उत्पन्न होने की तिथि से एक महीने के भीतर भरा जाए। सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों को वार्षिक आधार पर यह रिपोर्ट देनी होगी कि कितने आरक्षित पद रिक्त हैं, कितने भरे गए हैं, रिक्तियों के कारण, इसमें लगा समय आदि, ताकि आवधिक जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
पीठ ने कहा, चार महीने में भरे जाने वाले पदों में हाशिए पर पड़े और अल्पप्रतिनिधित्व वाले समुदायों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित पदों को प्राथमिकता दी जाए, जिनमें दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित पद भी शामिल हैं। अदालत ने आगे कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के नियमों के अनुसार विभिन्न प्रकार के आरक्षण के अंतर्गत आने वाले संकाय भर्ती के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाए जा सकते हैं।
छात्रवृत्तियों के भुगतान में देरी पर भी कोर्ट ने लिया संज्ञान
कोर्ट ने छात्रवृत्तियों के भुगतान में देरी और कई बार छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोकने आदि की घटनाओं पर भी संज्ञान लिया है क्योंकि इसके चलते छात्रों को तनाव होता है। साथ ही आदेश दिया है कि सभी लंबित छात्रवृत्तियों का बकाया भुगतान संबंधित केंद्रीय और राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा चार महीने के भीतर किया जाए।
यदि भुगतान न होने का कोई कारण हो, तो संबंधित उच्च शिक्षण संस्थान और छात्र को दो महीने के भीतर कारण सहित सूचना भेजी जानी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में दी जाने वाली सभी छात्रवृत्तियों का वितरण संबंधित केंद्रीय और राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा स्पष्ट समय सीमा के भीतर और बिना किसी देरी के किया जाए।
अपरिहार्य प्रशासनिक विलंब के मामलों में भी, उच्च शिक्षण संस्थानों को नीतिगत रूप से छात्रवृत्ति प्राप्तकर्ताओं को उनके पैसे के भुगतान या निपटान के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराना चाहिए। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि किसी भी छात्र को परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाना चाहिए, छात्रावास से नहीं निकाला जाना चाहिए, कक्षाओं में भाग लेने से नहीं रोका जाना चाहिए, या छात्रवृत्ति के वितरण में देरी के कारण उनकी मार्कशीट और डिग्री को रोककर नहीं रखा जाना चाहिए। ऐसी किसी भी संस्थागत नीति की सख्ती से जांच की जानी चाहिए।
रैंगिंग को लेकर कोर्ट सख्त
शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग रोकने के बारे में आदेश देते हुए कोर्ट ने कहा है कि सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को विशेष रूप से यह सख्त चेतावनी दी जाती है कि वे उन सभी नियमों का पूर्णत: पालन करें जो उन पर बाध्यकारी हैं, जिनमें यूजीसी का उच्च शिक्षा संस्थानों में रैगिंग की समस्या पर अंकुश लगाने संबंधी रेगुलेशन, 2009, यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) रेगुलेशन 2012, यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में महिला कर्मचारियों और छात्रों के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण) रेगुलेशन 2016, यूजीसी (छात्रों की शिकायतों का निवारण) रेगुलेशन 2023, आदि शामिल हैं।
इसके अलावा विशेष रूप से, रैगिंग विरोधी समितियों और रैगिंग विरोधी दस्तों, भेदभाव विरोधी अधिकारियों,आंतरिक शिकायत समितियों और छात्र शिकायत निवारण समितियों की स्थापना औरसंबंधित शिकायत निवारण तंत्रों के लिए विस्तृत प्रक्रियाओं कासख्ती से पालन किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने छात्रों को सुरक्षित वातावरण देने की बात करते हुए देश भर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे किसी भी छआत्र की आत्महत्या या अप्राकृतिक मौत की जानकारी मिलते ही पुलिस को सूचित करेंगे।
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