दिल्ली स्थित साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन कोर्सेज की शुरुआत के बाद दो साल में ही तस्वीर बदल गई है। स्टूडेंट्स बढ़ गए हैं। 2026 से नए कोर्स और कैंपस प्लेसमेंट शुरू करने की तैयारी है। इसी के साथ कई देशों ने अपने हिस्से का पैसा देना भी शुरू कर दिया है।
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) देशों की संसद से मंजूरी के बाद 2010 में बनी अंतरराष्ट्रीय साउथ एशियन यूनिवर्सिटी (SAU) में पिछले दो वर्षों में नये एडमिशन में तीन गुना तक का इजाफा हो गया। इसका सबसे बड़ा कारण मार्केट की डिमांड वाले नए ग्रेजुएशन कोर्सेज को शुरू करना रहा है। बीटेक, इंटीग्रेटिड बीबीए-एमबीए, बीएस-एमएस जैसे कोर्सेज शुरू हुए हैं।
अब 2026 के लिए भी कुछ नए कोर्सेज शुरू करने का फैसला कर लिया गया है।
नए कोर्सेज, स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ने का एक और बड़ा असर यह रहा है कि 2025 में कई देशों ने लंबे समय के बाद अपने हिस्से की ग्रांट (एरियर समेत) दी है। मालदीव ने चार वर्षों के बाद 2025 में अपने हिस्से का पैसा दिया, तो बांग्लादेश की ओर से बीते चार वर्षों में सबसे ज्यादा ग्रांट इसी सेशन में दी गई है। यूनिवर्सिटी के कुल छात्रों में से 90 प्रतिशत और मौजूदा सेशन में हुए नये एडमिशन में से 95 प्रतिशत भारतीय छात्र हैं।
अब यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन कोर्सेज शुरू हुए हैं और कैंपस प्लेसमेंट सेल भी बनाई जाएगी। अभी तक ज्यादातर पीजी कोर्सेज थे तो पीजी कोर्स वाले काफी छात्र पीएचडी में एडमिशन ले लेते थे, प्रो. अग्रवाल, प्रेजिडेंट, SAU।
प्रो. अग्रवाल ने बताया कि BS MS कोर्स शुरू किया गया और एसएयू के बाद इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस (बेंगलुरु) में भी यह कोर्स लाया गया। एसएयू में बड़ी संख्या में साउथ के छात्रों ने इस कोर्स में एडमिशन लिया है। बीटेक कोर्सेज में सबसे ज्यादा एडमिशन हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन को ध्यान में रखते हुए यूनिवर्सिटी में बड़े फैसले लागू किए गए हैं।
SAU का 2026 सेशन का प्लान क्या है?
South Asian University में ग्रेजुएशन के नए कोर्सेज शुरू करने का फैसला करने वाले यूनिवर्सिटी के प्रेजिडेंट प्रो केके अग्रवाल ने एनबीटी को बताया कि यूनिवर्सिटी में मास्टर ऑफ लॉ (LLM) तो शुरुआत से ही पढ़ाया जाता है, जिसकी काफी मांग है। अब 2026-27 में एलएलबी कोर्स भी शुरू किया जाएगा।
एलएलबी में 60-60 सीटों के दो सेक्शन होंगे।
इसके अलावा जर्नलिज्म में बैचलर व मास्टर लेवल के नए कोर्स होंगे। इसकी तैयारी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के दो स्टूडियो तैयार किए जा रहे हैं।
बीबीए व एमबीए कोर्स की सीटें भी ज्यादा होंगी। एक-एक सेक्शन बढ़ाने की कोशिश है।
मास्टर आफ डेटा साइंस शुरू किया जाएगा, जो मैनेजमेंट और कंप्यूटर साइंस का मिश्रण है।
पहले क्यों शुरू नहीं हुआ LLB कोर्स?
अभी तक एलएलबी कोर्स शुरू नहीं करने के पीछे एक कारण यह माना जाता रहा है कि हर देश की बार काउंसिल व उसके नियम अलग हैं। ऐसे में दूसरे देशों के छात्र अपने देशों में जाकर बार काउंसिल में कैसे रजिस्ट्रेशन कर पाएंगे? लेकिन अब इसका समाधान निकाल लिया गया है। सभी सार्क देशों के एलएलबी का सिलेबस स्टडी करने पर सामने आया कि 90% सिलेबस तो कॉमन है। बाकी जो 10% सिलेबस है, उसके लिए अलग सेक्शन बनाकर उन देशों के ही एक्सपर्ट्स से ऑनलाइन क्लासेज के जरिए भी पढ़ाई करवाई जाएगी।
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